भाग दो
पर ये गहराती शाम,
कहाँ जीने देती यादों के ढेरों में,
उत्सुक यायावरी ये,
एहसास कराती उस सच का,
जिसकी अनुपस्थिति में
गढ़ लिए गए कई झूठ,
जो मानो सागर के मूल्यवान मोती,
जिनकी तलाश में,
जीवन कब खारा हो गया-
पता ही नहीं चला।
©Keshav S. / V.

भाग दो
पर ये गहराती शाम,
कहाँ जीने देती यादों के ढेरों में,
उत्सुक यायावरी ये,
एहसास कराती उस सच का,
जिसकी अनुपस्थिति में
गढ़ लिए गए कई झूठ,
जो मानो सागर के मूल्यवान मोती,
जिनकी तलाश में,
जीवन कब खारा हो गया-
पता ही नहीं चला।
©Keshav S. / V.