सुनहली धूप's image
494K

सुनहली धूप


तीसरे पहर के घण्टे
कितने बेसुध और बेजान!
जान पड़ते हैं कुछ गतिहीन से।

धूप तब सूरज की भंगिमा बन
दिन चमकाने का काम करती है, 
सीधी-साधी सी दिखने वाली,
तपाती खुद है
और सूरज का नाम करती है।
Read More! Earn More! Learn More!