सुनहली धूप's image
Share0 Bookmarks 41243 Reads0 Likes

तीसरे पहर के घण्टे
कितने बेसुध और बेजान!
जान पड़ते हैं कुछ गतिहीन से।

धूप तब सूरज की भंगिमा बन
दिन चमकाने का काम करती है, 
सीधी-साधी सी दिखने वाली,
तपाती खुद है
और सूरज का नाम करती है।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts