खुदगर्जी खुद की खुद से खुद ही बयां मैं करता हु
आत्मसमर्पण के भावों में खुद ही जीता मरता हुं
कोई ना जाने कौन घड़ी में बादल बरसे मनमर्जी
प्यासी धरती, तन है प्यासा, मन भी प्यासा खुदगर्जी
इन नैनो का जल भी सूखा, अधरों की भी प्यास बुझीना
तड़प उठा है अंतर्मन भी, रातों में भी आंख लगीना
खुद की खुदाई, खुद ही करता, खुद्दारी से लड़ता हुं
चंदन भीतर , बाहर चंदन , भुजंग लपेटे फिरता हुं