
आहटे नहीं है
उन दमदार कदमों के चाल की,
गुज़रती है जेहन में ..
वो बोल
‘मैं हूँ न..
तुमलोग घबराते क्यों हो ?’
वो सर की सीकन और जद्दोजहद,
हम खुश रहे..
ये निस्वार्थ भाव कैसे ?
आप पिता थे..
अहसास है अब भी
आपके न होकर भी होने का
गुंजती है..
तुमलो
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