ठंडी हवा के तेज झोंके
पेड़ों को झूला झुलाते तो होंगे
सुबह नहीं तो शाम को सही
हम उनको याद आते तो होंगे ।
देख कर अपनी अंजुरी को
याद तो हमारी आती होगी
या फिर क्या पता अब वो
कहाँ किस्मत आज़माती होगी
साथ में थे जो देखे थे सपने
उनको भी तो सताते होंगे
हम उनको याद आते तो होंगे ।
© पमेश कुमार

