कीचड़ में कमल
कमल कीचड़ में खिलता है
इस पर तो कोई विवाद नहीं
वो कमल तो कितना प्यारा है
पर कीचड़ किसी को याद नहीं ।
पत्ते पर ओंस के कण है जो
कल को जिनका नाम नहीं ,
जल से भरे घट में जैसे
तेल की बूंद का काम नहीं ।
राह में बिखरे कंकड़ – सुइयां
कहाँ शुरू तो खतम कहीं
बदले रास्ते को संवारने के
संभाल लो अपने पैर वहीं ।
सोच और नीयत सबकी पृथक
जरूरी नहीं हो हमारे जैसी
नीयत रहती बनती बदलती
सोच जरूरतों में मिलती रहती ।
© Pamesh Kumar
8894968737
