आम के पेड़ों के बीचों बीच
रिमझिम रिमझिम सी बारिश की बूंदे
‘दुल्हन की नजरों’ से झुके हुए पत्ते
जमीन पर एक तरफा पानी का बहाव
खंभे पर सिसक कर बैठे पंछी
शांत मन, मीठी यादें
भूल कर सारे गिले—शिकवे
कुछ गप्पशप कुछ राय हो जाए
तुम्हें अगर एतराज न हो तो
एक कप चाय हो जाए
© Pamesh Kumar

