मैं हूँ माँ की प्यारी बिटिया ,

पापा की राजकुमारी मैं

घर की फुलवारी की हूँ

नन्ही सी कली बड़ी प्यारी मैं

पापा मुझको तुम बढ़ने देना

माँ मुझको तुम खिलने देना

फुलवारी की डाली से मैं

देखो कहीं टूट ना जाऊँ

मुझको सपनों के पंख लगाये

पापा मुझको उड़ने देना

मैं सूरज की किरण बनूँगी

खुद मे शक्ति का ओज भरूँगी

जिसे कमजोर ना कोई तूफान कर पाए

हो गर्व सभी को मुझ पर एक दिन

नित ऐसे मैं प्रतिमान गढूंगी ।

पल्लवी रानी

मौलिक स्वरचित