राम



राम तुम कलयुग में मत आना,

अब ये धरती तुम्हारे योग्य नहीं हैं !


तुमने जो सिखाया सब भूल चुके हैं,

पुरुषोत्तम नहीं पाखंड से भरे हुए हैं !


कुर्सी के पीछे, मानवता को बेच चुके हैं,

इस पवित्र भूमि को मैला कर चुके हैं!


पूछो इस सूर्य से, देखता है क्या ये दिनभर,

क्या इसको राम-राज्य, दिखता हैं कही पर ?


राम तुम कलयुग में मत आना !


-पलक अग्रवाल