कृष्ण तुम कलयुग में मत आना,
ये धरती तुम्हारे योग्य नहीं हैं,
इस युग में प्रेम की कोई जगह नहीं हैं,
अब ना कोई राधा, ना कोई मीरा,
ना ही कोई श्याम हैं, ना ही कोई सुदामा,
यहाँ प्रेम के पीछे लेन - देन का हिसाब हैं,
प्रेम तो मतलब का कारोबार हैं,
नहीं करता अब कोई प्रेम निष्पाप हैं,
प्रेम अब लंगड़ा लाचार हैं,
प्रेम का फायदा उठाने वाले हज़ार हैं,
भूल गए हैं सब तुम्हारी सीख और कहानियाँ,
अगर आओगे तो सह ना पाओगे तुम ये सब,
इसलिए, कृष्ण तुम कलयुग में मत आना!
पलक अग्रवाल



