कौन पूछे हाल गिरती मीनारों का,दबे हुए को और दबाने का मिजाज़ है ज़माने का !घडी की सुई वक़्त तो बता सकती है पर,बता नहीं सकती वक़्त कैसा होगा किस्मत के मारो का !
कौन पूछे हाल गिरती मीनारों का,दबे हुए को और दबाने का मिजाज़ है ज़माने का !
घडी की सुई वक़्त तो बता सकती है पर,बता नहीं सकती वक़्त कैसा होगा किस्मत के मारो का !