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Ganga


गँगा

डमक -डमक डम डमरू बाजे,जटाये खोले शिव शम्भू नाचे,शीश पे रखा चंद्रमा साजे,नभ में छायी घनघोर घटायें,कल-कल करती जटाशंकरी अवतरे ,प्रफुल्लित धरती मिलने को हरषे,नतमस्तक हो, भगीरथ रो पड़े,पूरा करने भगीरथ को दिया वरदान,गँगा माई, आयी करने कल्याण !

— पलक अग्रवाल
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