एक आज़ादी ऐसी भी हो

की बिना डरें, सच बोल दूँ ।


एक आज़ादी ऐसी भी हो

की जो दिल कहे वो कर दूँ


एक आज़ादी ऐसी भी हो

की कोई क्या सोचेगा इसकी परवाह छोड़ दूँ।


एक आज़ादी ऐसी भी हो

की मन का पिंजरा खोल दूँ।

 

एक आज़ादी ऐसी भी हो

की दिमाग़ की ज़ंजीरे तोड़ दूँ।


एक आज़ादी ऐसी भी हो की

कुरितिया पुरानी त्याग दूँ ।


एक आज़ादी ऐसी भी हो

की नयी सोच को सम्मान दूँ।

 

हो गया आज़ाद देश मेरा,

अब अपनी आज़ादी का तिरंगा फहरा दूँ।।