हाँ चुप हूँ मैं ।


बहुत कुछ चल रहा है बाहर

बहुत कुछ चल रहा है मन में,

चुप हूँ मैं।


तेज दोड रही है ये दुनिया 

पीछे छूट रहा हूँ मैं,

चुप हूँ मैं।


इन मुस्कुराते चेहरों में मेरा भी चेहरा हैं 

बाहर से मुस्कुराता हूँ पर अंदर से निशब्द हूँ मैं,

चुप हूँ मैं।


क्या खा गया हूँ इन शब्दों को 

या ये शब्द खा गए हैं मुझको,

चुप हूँ मैं।


बदलना चाहता हूँ बहुत कुछ 

पर बदल नहीं पा रहा,

ये हलक मैं फँसी बातों को 

शब्दों में पीरों नहीं पा रहा,


शायद इसलिए चुप हूँ मैं,

हाँ चुप हूँ मैं ।