अंग्रेज़ी


बंद करो इस अंग्रेज़ी की दादागिरी को,

किस बात का दम्भ है इसे की गरदन तान के खड़ी है?

क्या कमी है संस्कृत, हिंदी, तमिल, मराठी, गुजराती में?

भाषा तो सिर्फ़ संवाद का काम करती है,

बात तो वो भी कर लेते है जो बोल नहीं सकते,

बात तो वो भी कर लेते है जो सुन नहीं सकते,

फिर क्या कमी है उनमे, जिन्हें अंग्रेज़ी नहीं आती ?

इस अंग्रेज़ी ने तो सिर्फ़ मुल्क को बाँटा है,

आज भी उस मुल्क के दो टुकड़े आपस में लड़ रहे है,

करोड़ों की जान ली है इस अंग्रेज़ी ने।

सीखना है तो हिंदी, गुजराती, तमिल, मराठी, पंजाबी सीखो,

सब घुल मिल गयी और मेरा महान राष्ट्र भारत बना दिया ॥

जय हिंद । जय भारत ॥


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पलक अग्रवाल