आम आदमी


करना बहुत कुछ चाहता हैं आदमी मगर

हालात, हाथ पकड़ कर पीछे खींच लेते हैं और

फिर सपनो को तोड़कर वह जीने लगता है एक आम ज़िन्दगी

जब जीवन की शाम होने लगती हैं तब गिला करता हैं

की बहुत कुछ कर सकता था !


-पलक अग्रवाल !