उल्टी सीधी चप्पल भी तो

जैसे कोई पहेली थी

बित्ते भर से दुनिया नापी

नन्ही मेरी हथेली थी


हर तारे से अपनी यारी

सबको नाम दिया हमने

जुगनू के संग खेल-खेल में

तम को पार किया हमने

शब्दों का जंजाल नहीं था

तितली मेरी सहेली थी

बित्ते भर से खुशियां नापी

नन्हीं मेरी हथेली थी



अंजुरी में सागर भरते थे

जल परियों का डेरा था

मिलजुलकर भोजन पकता था

क्या तेरा क्या मेरा था?

चहक रहे थे चिड़िया बनकर

दुनिया बड़ी नवेली थी

बित्ते भर से खुशियां नापी

नन्हीं मेरी हथेली थी।


वाह-वाही का लोभ नहीं था

कोरे पन्ने प्यारे थे

मैले मटमैले रहते थे

फिर भी सबसे न्यारे थे

मिट्टी का घर बना हुआ भी

जैसे कोई हवेली थी

बित्ते भर से दुनिया नापी

नन्ही मेरी हथेली थी