बिन काजल कजरारी आंखें
जुल्फें ज्यूँ बादल की पाँखें
बातें गुड़ में मिश्री घोलें
मन सोचे, क्या तुमको बोलें
हिय सुंदरतम से भी सुंदर
बाल रूप बैठा है भीतर
तेरा कहना क्यों बतलाऊँ
सुन अम्बर में उड़ता जाऊं
प्रियतम हो तुम सपनकुमारी
तिरछी कातिल नज़र तुम्हारी
तुलना किससे करूँ तुम्हारी
एकल तुम परियों पर भारी
शब्दरिक्त सा हो जाता हूँ
प्रेम कहाँ मैं लिख पाता हूँ
#पागल
