तेरे आने की उम्मीद's image
Nepali PoetryPoetry1 min read

तेरे आने की उम्मीद

रोमिलरोमिल February 8, 2022
Share0 Bookmarks 64665 Reads2 Likes
यूं हुईं वस्ल की उम्मीद फिर आज कम धीरे धीरे,
जैसे गुलाब की पंखुड़ियां मुरझा के बिखरती है धीरे धीरे।

हुआ था अपना सिलसिला शुरू एक गुलाब से,
फिर सुलग रहा है आज एक गुलाब धीरे धीरे।

कांटों से बचा के दामन लाया था तेरे लिए,

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts