उसने बोला कौवा भागा कान लिए,

सरकार उनकी थी हम भी चुप चाप मान लिए।


आरोपी के पास तथ्यों का झोला था,

सोचा सच बोल सकता है बंदा कितना भोला था।


56 इंच के सीने की सबको करनी पड़ती भक्ति है,

ऐसी कुछ गिरफ्तारियों से ही अखवारों में तस्वीर छपती है।


बस कुछ धाराओं की कर दी हमने ढेरी है,

मिल जायेगी बेल बस कुछ दिन की देरी है।


निकल जाओ जो बाहर खिलाफत को तौबा कर देना,

तपस्या का फल मिल जायेगा भक्त बनने का मौका ले लेना।


सत्य क्या है समझो तुम ये बस शब्दों का धोखा है,

जो सरकार में टिकता है उसके पास ही इतिहास लिखने का मौका होता है।


किताबें भी बदल गईं पाठ्यक्रम भी फिसल गए,

अच्छे अच्छे विद्वान भी माहौल देख के संभल गए।


अब अगली बार जब कोई बोले कौवा भागा कान लिए,

खुस रहना है जो तुमको तुम भी कहना जी सरकार मान लिए।


@रोमिल