बड़ी मुस्किल से मिला था छुआ छूत से छुटकारा,
भाई साहेब आप फिर इसे ले के आ गए।
इस बार क्या ब्राह्मण क्या राजा,
कानून बनाने वाले भी तुम से घबरा गए।
क्या ज़माना आ गया है हुजूर सात पर्दों में घूम रहें हैं सभी,
लोग अल्कोहल से अब दिल नहीं हाथों को सहला रहे।


