बिरजु महराज's image
76K

बिरजु महराज

हस्त बिखेरते थे मुद्रा, 
मोती बिखर रहे हों जैसे।
आंखे बयान करती थी कहानियां, 
राधा खुद निखर रहीं हों जैसे।
पग के घुंघरू  बजते थे, 
साज खुद संवर रहें हो जैसे।
मानस प
Read More! Earn More! Learn More!