आज एक रोटी भी नसीब नहीं

खुदा क्या मेरे हाथ में लकीर नहीं

दौलतमंद है मौत के सौदागर

भूखा हूं इसलिए हाथ में कांसा है शमशीर नहीं

सरहदें बनाते हैं सियासत मंद लोग

वरना प्रेम से ना मिटे ऐसी कोई लकीर नहीं

मुझे हिंदू मुसलमान में बांटते हैं धर्म के ठेकेदार

यह मेरी सरजमी है तुम्हारे बाप की जागीर नहीं

किसी ने बेचकर कासा किसी की भूख खरीदी है

वह मुफलिस जरूर है लेकिन फकीर नहीं

यहां तलवे चाट कर बुलंदियों को छूते हैं

तुम जमीन पर ही रहोगे कुमार तुम्हारी ऐसी तकदीर नहीं