जब घर से भाग कर किसी की शहजादी जाती है

मां की ममता भाई की राखी भी जाती है

कुछ सोचकर यह कदम उठाना मोहब्बत में

तुम्हारे साथ में मोहल्ले की लड़कियों की आजादी भी जाती है

जब घर से भागकर.........

अब कैसे जिएगा वो पिता जिसने प्यार लुटाया था एक परी पर

जिसकी बेटी लूट कर उसकी शान ले जाती है

जब घर से भागकर........

जिस भाई को गर्व था अपनी राखी पर वो अब नजर नहीं आता

यानी जिस्म छोड़ देती है और जान ले जाती है

जब घर से भागकर.....

चेहरे का नूर होठों की मुस्कान ले जाती है

अपने बच्चों से मामा की पहचान ले जाती है

अब और क्या कहूं से बढ़कर

अपने साथ किसी के सपने किसी बच्ची की पढ़ाई ले जाती है

जब घर से भाग कर,............ 

तुमने भी खामखा अपना वक्त बर्बाद किया है कुमार

अब कहां इन शब्दों की कहानी सुनी जाती है

जब घर से भाग कर.............