चलो आज जिंदगी से रूबरू कराते हैं

कुछ लोग जिंदगी ऐसे भी बिताते हैं

किसी को खाने के बाद नींद की गोली लेनी पड़ती है

कुछ भूख छुपाने के लिए जल्दी सो जाते हैं

अपने हुजरे से नंगे बदन फटी एड़ी लेकर निकलते हैं

जो कामगार कभी parahan to कभी मका बनाते हैं

मां की गोद के बिस्तर पिता के साए के कंबल में रहने वाले बच्चे

उनका कमरा नहीं बनाते जो इनके लिए घर बनाते हैं

बस फर्क इतना बैठा तुम्हारी और हमारी कलम में कुमार

कोई ग़ज़ल में महबूब बनाता है हम मां बनाते हैं