जिंदगी में मिले गद्दार बहुत हैं

झूठ बोलने को अखबार बहुत हैं

कभी मुफलिसी ने हाथ में कांसा नहीं थमाया

गरीब बेशक हैं लेकिन खुद्दार बहुत हैं

हर रोज किसी नए चेहरे से मुलाकात

यहां लोगों के चेहरे कम हैं नकाब बहुत हैं

सुना है ईमान जेब में रखकर चलते हो

शरीर एक ही है लेकिन लिबास बहुत हैं

हमने तो गम को भी दावत दे सुकून देकर बुलाया

गम ने कहा चल तेरे जैसे कुमार बहुत हैं