मुफलिसी का ये दौर भी देखना पड़ा मुझे

खाली हांडी को चौक पर टिकना पड़ा मुझे

चौखट के फकीर की फरियाद भी मुकम्मल नहीं हुई

खाना बना नहीं है ये कह कर भेजना पड़ा मुझे

इस मुफलिसी में अपने कभी मिले ही नहीं

फिर हार कर खुद खुद ही का होना पड़ा मुझे

मेरी मैयत का हश्र देखकर मौत ने इजाजत दी

फिर उठ कर अपने जनाजे पर रोना पड़ा मुझे

खुद को खुद ही ले गया मंजिले मकसूद पर

खोदकर कब्र उसी में सोना पड़ा मुझे