कभी कभी सोचता हूं, हर किसी का मुक्कमल तो हो ही जाता है,
कमी क्या थी मेरे मोहब्बत में,
क्या मेरे शज़दे में कमी थी?
क्या मेरे शिद्दत में कमी थी?
क्या मेरे भरोसे में कमी थी?
क्या मेरे में कमी थी ?


कभी कभी सोचता हूं, हर किसी का मुक्कमल तो हो ही जाता है,
कमी क्या थी मेरे मोहब्बत में,
क्या मेरे शज़दे में कमी थी?
क्या मेरे शिद्दत में कमी थी?
क्या मेरे भरोसे में कमी थी?
क्या मेरे में कमी थी ?