क्या तुम कभी रुके हो ,पेड़ के छआव के नीचे
और सोचा है,अपने बारे में
क्या तुम खोए हो अपने में, जैसे तुम खोते हो सपने में
यदि हां तो तुमने जरूर पाया होगा ,
कि कैसे तुमने कभी वर्तमान नहीं जिया ,
कैसे वर्तमान का एक एक पल तुमने भविष्य के श्रृं गार में गवाया,
और जब तुम्हारा वह भविष्य तुम्हारे वर्तमान में आया ,तो तुमने उसे अतीत के यादों में विता दिया ,
और इस तरह तुम्हारा जीवन बीत गया ,
भविष्य की कल्पनाओं में और अतीत की यादों से
और तभी मेरी नीद टूट गई और कल का दिन कैसा जायेगा ये सोचने में डूब गई।
