वतन पर दिन रात वारे,

इस महामारी में नींद गवाई है,

तब जाकर कही हमने जिस्म पर,

ये सफ़ेद वर्दी पायी है,


ऐ मेरे वतन अफ़सोस नहीं,

जो तेरे लिए ना सोये है,

महफूज़ रहे तू सदा,

ये सपने हमने संजोय है,


ऐ मेरे ज़मीन, तू महकती रहे,

दिल से मेरी ये फ़रियाद है,

परिवार हो या हो दोस्त कोई,

सब कुछ तेरे ही बाद है,


तेरी बगियों में महक जावा,

तेरे अम्बर में चहक जावा,

इतनी सी है दिल की आरज़ू,


तेरे दिल में बस जावा,

तेरे साये में ढल जावा,

इतनी सी है दिल की आरज़ू,


खुशियों से भरे परिवार मेरे,

छोड़ के उनको में चल पड़ा,

जब संकट आया देश पे,

तो उस संकट से मैं लड़ पड़ा,


क्या नाम है उसका,

क्या पहचान है,

यह हमने कभी ना जाना है,

बीमार जो हमारे पास है आया,

हमने उसको थामा है,


तेरी बगियों में महक जावा,

तेरे अम्बर में चहक जावा,

इतनी सी है दिल की आरज़ू,


तेरे दिल में बस जावा,

तेरे साये में ढल जावा,

इतनी सी है दिल की आरज़ू,


तू दुखी ना हो,

तू ही तो मेरी हिम्मत है माई,

तूने ही हरदम है बचाया,

मुसीबत की घड़ी जब है आयी,


ऐ मेरी दिलरुबा, तू रोये ना,

तूने ही मुझे सवारां है,

सब छोड़ के जो तेरे पास आ जाऊ,

ये मुझको नहीं गवारां है,


तेरी बगियों में महक जावा,

तेरे अम्बर में चहक जावा,

इतनी सी है दिल की आरज़ू,


तेरे दिल में बस जावा,

तेरे साये में ढल जावा,

इतनी सी है दिल की आरज़ू ||


- ओजस्वनी शर्मा

 "मेरे अलफ़ाज़"