मुश्किलों से मैं ना हारा हार कर भी जीत जाता सामने अपने खड़े थे उनसे कैसे पार पाता हार कर अपनों से भी देखो कैसे मैं सुखी हूं वो सभी जो जीत गये है दु:ख के आँसु रो रहे हैं युद्ध जीता पांडवों ने पा गये थे वो सिंहासन वंश को निर्मूल करके क्या करेंगे वो सिंहासन जब विभीषण जा मिला था भाई के शत्रु से जाकर मिल गयी सोने की लंका क्या मिला सुख उसको पाकर द्रौपदी ने प्रण लिया था केशों के रक्त् स्नान का मारकर कुरुवंश को क्या मिला निज वंश खोकर हारे जो वो मिट गये निर्मूल हो गये इस धरा से जो जयी थे युद्ध के वो भी कहाँ रह गये धरा पर जीत जाता हर किसी से जीत कर भी हार जाता सामने अपने खड़े थे उनसे कैसे पार पाता इसलिये गीता की व्याख्या कुछ अलग मैने बताई जंग जब अपनों से हो तो हार जाओ जितने को