जलता रावण पूछ रहा है धू-धू करके थूक रहा है मुझे जलाने तुम आये हो क्या साथ राम को लाये हो? एक राम भी नहीं भीड़ में स्वांग राम का धरते हो सब मुकुट पहनकर, माला डाले धनुष बाण लिए फिरते हो वनवासी का वेष धरा, और राम स्वयं को मान लिया अग्निवाण चलाने वालों क्या शील राम का लाये हो हर घर मे सीता अपमानित हर दिवस-रात वो रोती है आँगन में दीप जलाने वालों कलुषित मन लिए चलते हो दुःशासन तुम सबके अंदर बाहर दूर्योधन उमड़ रहे देवी दूर्गा पूजने वालों क्या मान देवीयों का रखते हो जलता रावण पूछ रहा है धू-धू करके थूक रहा है......