ख़ुब सुनाई देता है
अख़बारों में, टीवी में
विज्ञापनों में, रेडियो पर
पर दिखाई क्यों नहीं देता
कहीं मिस्टर इन्डिया तो नहीं
हो गया हमारा विकाश ?
जो सिर्फ़ सुनाई देता है
दिखाई नहीं देता ।
शायद मिल गयी है विकाश को
वो जादुई घड़ी
और बाँध ली है कलाई पर
ताकी ग़ायब रहे
हमारी नज़रों से
दिखे केवल नेताओं को
उनके चमचों को ।
तभी तो
मेरे गाँव की सड़क
अब तक कच्ची है
पर सामने लगा बोर्ड बताता है
यहाँ पक्की सड़क है
करोड़ों की लागत से ।
सामने अस्पताल पर ताला है
पर रजिस्टर बताता है
यहाँ रोज़ डाक्टर आते हैं
मरीज़ भी आते हैं
दवायें भी बँटती है
मुफ़्त में हर रोज़
दायें हाथ है सरकारी स्कूल !
टीचर नदारद, कमरें ख़ाली
दीवार दरारी, कुर्सी टूटी
सन्नाटे का शोर
पसरा चारों ओर ।
पर मध्यान्ह भोजन रोज़ बनता है
परोसा भी जाता है
स्कूल ड्रेस भी बँटती है
रजिस्टर तो यही बताता है ।
मनरेगा की योजना
ग़रीबों की भाग्य विधाता !
हर रोज़ खुदाई होती है
गाँव के तालाब की
कच्ची सड़क भरी जाती है ।
पर ये सड़क और तालाब
दिखाई क्यों नहीं देती ?
क्या इन्हें भी मिल गयी है जादुई घड़ी ?
मौसी रोज़ डाकखाने जातीं हैं
अपनी विधवा पेंशन लेने
पर मिलती नहीं पेंशन
बाबू कहता है- मत लो टेंशन
ज़रूर मिलेगी, जब आएगी पेंशन
पेंशन आयी तो थी
हर महीने आती है
पर दिखती क्यों नहीं ?
बँटती क्यों नहीं ?
राशन की दूकान पर
लाईन दिखती है
राशन नहीं दिखता
तेल निकलता है
तेल नहीं मिलता
चीनी आती है फिर मिलती क्यों नहीं ?
अगर मिले मुझे मिस्टर इंडिया
तो माँगूँगा उनकी घड़ी
कुछ पल के लिए
देखना है मुझे भी वो विकाश
जो सिर्फ़ सुनाई देता है।


