मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ मैं ईश्वर हूँ, मैं ही ब्रह्मांड
आदि -अनादि मैं, मैं ही अनंत
मैं यहाँ-वहां हूँ, कण-कण मे हूँ जल, वायु, आकाश, पृथ्वी हर जीवन के रग-रग में हूँ मैं जन्म मृत्यु मे,  निंदा स्तुति मे आशा निराशा मे सुख दुःख मे
जीवन मरण मे मैं ही हूँ मैं हूँ विनाश मे और विकास मे सुख दुःख मे मैं, हर्ष विषाद मे मैं हूँ।।
मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ। नदियों मे, सागर मे भी मैं चन्द्र सूर्य की धवल किरण मैं ग्रह नक्षत्र और तारों मे, मैं युगों-युगों तक हूँ अनंत चर अचर रहूं, जीतूं-हारूँ देव दानव नर पशु
चर चराचर जीव हूँ स्वाद, स्पर्श, सुगंध सभी में ईर्ष्या, द्वेष, प्रशंसा मे सुर, ताल, लय-स्वर, सब मे मैं हूँ
अमृत कलश मैं, प्रेमधुन मैं
विष की प्याली, विष बुझा तीर मैं
मैं खड्ग मे, मैं खम्भ मे भी
जय पराजय, बिष घटक
हर तरफ तो मैं ही मैं हूँ।।
मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ।
 
मैं शिव हूँ- कैलाशपति
मैं विष्णु हूँ - पालनहारी
मैं गंगाधर, मैं नीलकंठ
मैं चक्र सुदर्शनधारी भी
मैं गीता, मैं रामायण हूँ
मैं राम मे, मैं कृष्ण मे
दूर्गा-काली रणचण्डी मैं
मैं इस सृष्टि के कण कण मे हूँ।।
मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ।