मेरे रंग मे तुम रंगो, मै रंगू तुम्हारे रंग हम दोनो के रंग मे, रंग जाये संसार मै हरे रंग मे रंग जाऊं, तुम केसरिया हो जाना जाति धर्म के रंग मिलाकर, इन्द्रधनुष बन जाना जले होलिका आज और बच जायें प्रह्लाद नरसिंहा का रूप धरो, आओ फिर भगवान औघरधानी हे शिव-शम्भु, प्रलयंकारी रुप उतारो विषपायी शंकर बन जाओ, भंग-धतूर का पान करो हे कान्हा! अब चक्र उतारो, मुरली कमरबन्ध से खोलो बेसुध हो जाये सब ग्वाले, ऐसी कोई तान सुनाओ राधा मीरा हो जाये और मीरा भक्तिभोर रंग चढ़े सबपर ऐसे की, सब हों माखनचोर