
कुछ सिक्कों की तलाश में
दर दर भटकता हूँ
लौट जब घर को आता हूँ
घर की तलाश में, घर में भटकता हूँ ।
दीवारों, बन्द दरवाज़ों की क़ैद में
गुमशुदा हवा ढूँढता हूँ
दो बून्द खूशबू की तलाश में
खुली खिड़की बन्द कर आया हूँ ।
राह चल कर, थोड़ी दूर,
लौट आया हूँ
बीच रास्ते में, अधूरे ख़्वाब
अधूरी मंज़िल छोड़ आया हूँ
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