चलीं ख़्वाबों के बादल पर लेके ऊँचाइयाँ
इनके पीछे छिपी हैं मेहनत की गहराईयाँ
खो ना जाना खुद से फ़र्ज़ की राह पे चलते चलते
ख़ुद को अपने संग ले लेना इस राह पर जाते जाते
बहुत बार हुई हैं मेरी ख़ुद से ही लड़ाईयाँ
झेले बहुत अँधेरे और दुःख की परछाईयाँ
वक़्त ने लगाए मसरुफियत के ताले मुलाकातों पर दिल भी ख़ामोश ही रहा अपनों की कडवाहटों पर
फिर सब्र बना दोस्त ख़ामोशी से हुई यारियाँ
और थी मंज़िल पे नज़र आराम से थी दूरियाँ
कुछ देर रुकें आज मे अपने हसीन कल के लिये
कुछ मीठी यादें सुनें एक साथ एक पल के लिये
वक़्त का क्या है गुज़र कर रहेगा वो तो हर हाल में नाउलझा अपनी मोहब्बत मसरूफियत के जाल में
रख लेना अपनी पलकों में ख़्वाब छुपाकर अभी
हक़ीक़त बन जाएँगे सारे एक दिन यकीनन सभी
NOOR EY ISHAL

