तुम मुझे अच्छे लगते हो
झूठे हो फिर भी
सच्चे लगते हो
मक्कारी चेहरे से अयां है
बड़े ही शरीफ हो
ये दिल का बयां है
अमानत में भी ख़यानत है
ना जाने क्यूँ
तेरे होने की चाहत है
कोयले की सी दलाली है
पर बातें तेरी मतवाली है
बेईमानी का खेल है
पर सबका तुझसे मेल है
NOOR EY ISHAL

