खोयी हवाएँ चली तेरी ओर
खोयी हवाएँ चली तेरी ओर
बाँधे मुझे तुझसे कोई डोर
मन बावरा क्यूँ मचाये शोर
दिल हुआ रौशन जैसे भोर
नदिया के जैसे हम दो छोर
खोयी हवाएँ चली तेरी ओरssss
खोयी हवाएँ चली तेरी ओरररररररररररर sssssssss
बस कर लड़की क्यूँ इतना गला फाड़ फाड़कर गा रही है.. घर के नीचे सारे गधे इकट्ठा हो गए हैं. आज कॉलेज नहीं जाना है क्या?
"जाना है भाई, पर तुम कब से फोन पर चिपके हुए हो, मैं कब से तैयार होकर इधर उधर घूम रही हूँ. इसीलिए सोचा बालकनी में जाकर गाने की प्रैक्टिस कर लूँ." चारु ने अपने भाई निखिल से कहा
"हाँ, ऑफिस से एक फोन था, तुम्हारी तरह खाली नहीं बैठा हूँ. दो मिनट में नीचे आ जाओ नहीं तो फिर टैक्सी से जाना.
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"सुनो, तुमसे दोस्ती करने के लिए और क्या क्या करना पड़ेगा." चारु अपनी क्लास मेट निशी से बोली
"कुछ खास नहीं.. बस दो किलो फ्राइड चिकन खिला दो."
"बस,इस खाने पे सबकी कहानी ख़त्म हो जाती है. जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे दोस्ती."
"अरे, चारु मैंने मज़ाक़ किया था. देवी इसे ज़्यादा गंभीरता से ना लें. अच्छा सुनो मेरे कुछ रूल्स हैं, अगर वो मंजूर हैं तो बिल्कुल हम दोस्त बन सकते हैं. "
" और वो रूल्स क्या हैं "चारु ने अपनी आँखें बड़ी करते हुए कहा.
" सिर्फ़ पढ़ाई पर फोकस करना होगा,लड़कों से बिलकुल बात नहीं करनी है और वीक में दो दिन लाइब्रेरी जाकर नोट्स बनाने होंगे.और वीक के लास्ट डे कैन्टीन में बैठकर कुछ खा सकते हैं "निशी ने चारु को देखते हुए कहा
" मंजूर है "
" बहुत जिद्दी हो, दोस्ती करके ही मानोगी." निशी ने हँसते हुए कहा
" वो तो मैं हूँ "
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"भाई मुबारक हो, आख़िरकार भाभी को दोस्ती करने के लिए राज़ी कर ही लिया. "चारु ने कॉलेज से वापस आकर अपने भाई के गले लगकर कहा
" कौन सी भाभी, कैसी भाभी, तेरा दिमाग़ तो ठीक है. "निखिल चिढ़कर बोला
" भाई, एक लड़की है मेरे साथ कॉलेज में है. अभी न्यू एडमिशन है.. उसे देखकर यही लगा कि ये मेरी भाभी है पता नहीं क्यूँ. बस फिर उससे दोस्ती करने की कोशिश में लग गयी. बड़ी उसूल पसंद लड़की है बहुत पापड़ बेलने पड़े उससे दोस्ती करने के लिए. "चारु बड़ी तफ़सील से निखिल को बता रही थी.
" हाँ, फिर पापड़ बेल और भाई के माथे पे सेंक दे. चल जा यहाँ से अपना काम कर.. भाभी भी अब तेरी मर्ज़ी से लाऊँगा.. माँ, चारु को क्या खिला रही हैं आजकल कुछ ज़्यादा ही दिमाग़ चलाने लगी है. "
" भाई, देख भाभी तो अब वही बनेगी.. तू चाहे मान या ना मान.. इस Impossible Love Story को पॉसिबल तो बनाकर ही रहूँगी. "
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" चारु, तू दो दिन से कहाँ है.. कॉलेज क्यूँ नहीं आ रही है "
" निशी, मैं तुझे कुछ नहीं बता सकती हूँ.. अगर तू मेरे घर आ सकती है तो मैं तुझे सब बता दूँगी. "
" ठीक है, अड्रेस दे अपना.. मैं आती हूँ. "
" क्या कोई यहाँ रहता है.. या बेल सिर्फ़ अपने शौक़ के लिए लगवा रखी है. "निशी ने चारु के घर के दरवाज़े पर जोर से दस्तक देते हुए कहा
" क्या बात है, कौन हैं आप, क्या कोई तमीज है आपको, अजनबी घर पे आकर दरवाजा पीट रही हैं "निखिल निशी के इस तरह दरवाज़ा पीटने से बुरी तरह चिढ़ गया था.
" सॉरी, मैं बहुत देर से बेल ही बजा रही थी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया इसीलिए ऐसा किया. क्या ये चारु का घर है? मुझे उससे मिलना है? "
" ओह, तो आप चारु मैडम की सहेली हैं.. मैं भी तो यही सोच रहा था कि ऐसा कोई कैसे कर सकता है.. लेकिन आप चारु की दोस्त हैं तो उसी की तरह होंगी तो बिलकुल आप दरवाज़ा पीट भी सकती है और तोड़ भी सकती हैं. "
" ज़बान सम्भाल कर बात करें..आप मुझे अभी जानते नहीं हैं "निशी ने उसे धमकाया
" मैडम, मेरे इतने बुरे दिन नहीं आये जो मैं आपको जानना चाहूँगा. अंदर जाकर राइट साइड की सीढ़ियों से ऊपर चले जाइए. चारु वहीं मिलेगी. भाई हूँ उसका. "
निखिल बाइक स्टार्ट करते हुए बोला.
" ही ही ही ही, पहली मुलाक़ात मुबारक हो भैय्या और भाभी" अपने कमरे की खिड़की से दोनों की बहस देखकर चारु मुस्कुराते हुए धीरे से बोली
" क्या तुम्हारा भाई तुम्हारी शादी कराना चाहता है.. इसीलिए उसने तुम्हें कॉलेज जाने से मना कर दिया है." निशी चारु की मनगढ़ंत कहानी पर यकीन करते हुए हैरत से बोली.
" हाँ निशी, इसी वजह से मैं कॉलेज नहीं आ रही हूँ. तुम्हें इसलिए बुलाया है जिससे तुम भाई को समझा सको. बाकी किसी और को तो मैं ये प्रॉब्लम बता भी नहीं सकती हूँ कि मेरा अपना भाई मेरे करिअर का दुश्मन हो चला है."
"तुम फिक्र ना करो,मैं तुम्हारे भाई से बात करुँगी. "
" सुनें, आप अपनी बहन के साथ ऐसा नहीं कर सकते हैं, माना बड़े भाई हैं लेकिन आप उसकी ज़िंदगी का इतना बड़ा
फ़ैसला अकेले नहीं ले सकते हैं. आप अपने आप को क्या समझते हैं?मैं हरगिज़ अपनी दोस्त के साथ ऐसी नाइंसाफी नहीं होने दूँगी."
"ठीक है जो करना है कर लो.रास्ता छोड़ो मेरा अंदर जाना है. " निखिल ने बड़े इत्मीनान से अंदर जाते हुए कहा
" देख लूँगी तुम्हें. "निशी उसके इत्मीनान पर बहुत ज्य़ादा चिढ़ गयी थी.
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" माँ, अपनी चारु की सहेलियाँ भी उसकी तरह सरफिरी हैं. आज सुबह जो आयी थी पता नहीं कैसी कैसी बहकी बातें कर रही थी."
"बहकी वो नहीं थी तेरी बहन कुछ ज़्यादा ही शरारती हो गयी है. तेरे ज़ुल्म के मनगढ़ंत किस्से सुना रही थी. तू इसकी शादी जबरदस्ती कराना चाहता है,
तूने इसे कॉलेज जाने से मना कर दिया है. और ना जाने क्या क्या.. ये तो अच्छा हुआ कि मैं वहाँ नाश्ता लेकर चली गयी थी. जो मुझे ये सब पता चल गया था.
चारु बेटा ऐसे मज़ाक़ अक्सर बहुत तकलीफ़ दे जाते हैं. तुम्हें निशी के भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए. "
" माँ,मेरा कोई गलत इरादा नहीं है मैं बस भैय्या से उसकी शादी कराना चाहती हूँ. पता नहीं उसके साथ मुझे अपनी भाभी वाला फील आता है."
"उफ्फ.. चारु तेरा क्या दिमाग ख़राब हो गया है. माँ आप इसे समझा ले अगर मैंने इसे कुछ कहा तो इसकी हिमायती ना बन जाना आप.चारु तेरे पास कल तक का टाइम है अपना फैलाया हुआ रायता समेट ले नहीं तो निशी को जाकर सब बता दूँगा. "निखिल ने चिढ़ते हुए कहा
" ना, बिलकुल नहीं, जब तक तुम हाँ नहीं करोगे तब तक मैं उसे ऐसी ही कहानियाँ सुनाती रहूँगी. बल्कि तुम्हारे ज़ुल्म की और भी ज़्यादा ख़तरनाक कहानियाँ सुनाऊँगी. "
" चारु, बस कर, भाई को कुछ ज़्यादा ही तंग करने लगी है. "
" अरे माँ, चारु से नाराज होने का कोई फायदा नहीं है , लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं.मैं ख़ुद ही इससे निपट लूँगा "
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" निशी मुझे तुमसे कुछ बात करनी है."
" जी कहें क्या काम हैं कैसे आना हुआ यहाँ "निशी ने निखिल को देखते हुए गुस्से से कहा
" क्या हम कॉफी शॉप में बैठकर बात कर सकते हैं. यकीं करो,, जैसा तुम सोच रही हो वैसा बिलकुल नहीं है. एक बार मेरी बात सुन लो."
"ठीक है, चलिये "
" निशी, चारु तुम्हें मनगढ़ंत कहानियाँ सुना रही है. ऐसा कुछ नहीं है, बल्कि वो तो हम सबकी जान है,और अक्सर इसी बात का फ़ायदा उठाकर मनमानी करती रहती है. और जब किसी बात पर अड़ जाती है तो हमें उसकी वो जिद पूरी करनी ही होती है.
कुछ नहीं कर सकते हैं वो बचपन से ही ऐसी है. "
" तो मुझे आपके बारे में ये सब कहानियाँ सुनाकर कौनसी ज़िद पूरी करना चाहती है.. "
" वो चाहती है कि तुम उसकी भाभी बनो "
" क्या ssss"
"निशी, मेरी बात सुनो, मुझे पता है तुम्हें चारु पर बहुत गुस्सा आ रहा होगा.. और आना भी चाहिए कोई किसी की ज़िंदगी के बारे में ऐसे फ़ैसला कैसे ले सकता है. लेकिन एक सच और भी है तुम अब मेरी पसंद बन गयी हो. मुझे तुम उस दिन बहुत अच्छी लग रहीं थी जब तुम चारु के लिए मुझसे लड़ रहीं थी. वो लम्हें सारी कहानी ही बदल गए थे.
इसीलिए आज तुम्हें ये सब बताने चला आया क्यूँकि कहीं चारु की कहानियों से तुम आगे जाकर हर्ट ना हो जाओ.
मैं तुम्हें दुखी नहीं देख सकता हूँ. "
" ऐसा कभी नहीं हो सकता है. एक सलाह देना चाहूँगी आप दोनों भाई बहन को.. दूसरों पर अपनी ख्वाहिशें डालने से पहले सामने वाले के हालात भी जान लेना चाहिए. "
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" भाई, आज पूरे सात दिन हो गए हैं निशी कॉलेज नहीं आयी है. क्या जरूरत थी उसे सब बताने की. मैं कोशिश कर रही थी ना.. वो मान जाती लेकिन आपने उसे जिस तरह बताया है उसे यही लगेगा कि हम दोनों ने उसे धोखा दिया है. "
" नहीं, चारु, कोई और बात है चलो आज उसके घर जाकर बात करते हैं "
" क्या सच भाई... "
" हाँ.. माँ को भी ले चलते हैं "
" डैडी का क्या, उनको कैसे बताएँगे? "
" चारु फ़िक्र ना करो, वो माँ सम्भाल लेंगी. "
" भाई, मेरी दुआ है कि निशी हमें वापस मिल जाये. "
" ज़रूर मिलेगी "
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" जी, आप कौन? "
" मैं निशी की सहेली चारु हूँ. कई दिनों से कॉलेज नहीं आयी थी तो सोचा उसके घर जाकर उसकी खैरियत पता कर लूँ? "
" अच्छा, तुम चारु हो, आओ बेटा अंदर आओ, अच्छा हुआ तुम आ गयीं, पता नहीं क्या हुआ है बस गुमसुम कमरे में बंद रहती है. कॉलेज भी नहीं जा रही है..तुम उससे पता करो क्या हुआ है?? शायद तुम्हें बता दे? "निशी की माँ परेशान होकर बोलीं.
" बहनजी, हमें मालूम है निशी को क्या हुआ है? उसी सिलसिले में हम आपसे बात करने आये हैं. चारु तुम निशी के पास जाओ. "
चारु की माँ ने चारु को निशी के पास जाने को कहा और निशी की माँ को सारी बात बता दी.
" ओह तो तभी निशी इतनी उदास है. आपको शायद निशी के बारे में पता नहीं है.. निशी हमारी बहुत सुघड़ बच्ची है. हर काम में माहिर, किसी भी गुण की उसमें कमी नहीं है लेकिन जब किस्मत साथ ना दे तो सारे गुण भी बेकार हो जाते हैं.
बहनजी निशी की एक साल पहले शादी हुई थी शादी के दो महीने बाद उसके ससुराल वाले किसी पंडित के यहाँ उसे लेकर गये. उस पंडित ने बताया कि अगर ये शादी बनी रही तो उनका बेटा मर जायेगा..
वो लोग डर गए और उसी हफ्ते निशी को वापस घर भेज दिया. फिर एक महीने बाद तलाक का नोटिस भिजवा दिया. हमने भी कुछ नहीं कहा क्यूँकि जहाँ अंधविश्वास सिर पर चढ़कर बोलने लगे वहाँ कुछ भी समझाना बेकार हो जाता है.
निशी पर इस बात का बहुत गहरा असर हुआ था.. हमने उसे नॉर्मल करने में बहुत मेहनत की और उसे वापस कॉलेज भेजा जिससे ये अपनी पढ़ाई पूरी करके अपने पैरों पर खड़ी हो सके. "
निखिल और चारु की माँ की आँखों में आँसू भर आये. कैसी विडम्बना है कि पढ़े लिखे लोगों पर भी अंधविश्वास अपना कब्जा जमा लेता है.
" बहनजी, कोई और समान्य परिस्थिति होती तो मैं निशी की पसंद ज़रूर जानती, लेकिन अब मैंने तय किया है कि निशी मेरी ही बहु बनेगी. "
" हाँ, माँ, मैं आपसे सहमत हूँ." निखिल ने मुस्कुराते हुए माँ का साथ दिया.
"बहुत शुक्रिया बहनजी, रब के घर देर ज़रूर है लेकिन अँधेर नहीं है."निशी की माँ रोने लगी थीं.
" नहीं बहन , अब आप रोये नहीं, बस खुश होकर हमारी बहु को उसके घर भेजने की तैयारी करें , हम जल्दी ही पूरी फॅमिली के साथ आकर इन बच्चों की शादी की तारीख पक्की कर देंगे. आप निशी के पापा और अपनी फॅमिली से भी बात कर लीजे. हमारे बारे में कुछ भी जानना है तो आप बिलकुल जाँच पड़ताल कर सकते हैं. यहाँ शहर में ज्यादातर सभी हमें जानते हैं. "
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" देखा इतना बड़ा मसला था नहीं जो पूरे सात दिन का वनवास लेकर कमरे में बंद थी. मुझे सब बता सकती थी तुम.. हमारा फ़ैसला तब भी यही होता. "चारु ने निशी को गले लगाते हुए कहा.. दोनों रूम की खिड़की से सारी बातें सुन चुके थे.
" अच्छा भाभी , क्या भाई से मिलना चाहेंगी. "चारु ने शरारती होकर कहा
" चारु... बस करो "निशी ने शर्माते हुए कहा
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खोयी हवाएँ चली तेरी ओर
खोयी हवाएँ चली तेरी ओर
बाँधे मुझे तुझसे कोई डोर
मन बावरा क्यूँ मचाये शोर
दिल हुआ रौशन जैसे भोर
नदिया के जैसे हम दो छोर
खोयी हवाएँ चली तेरी ओरssssss
खोयी हवाएँ चली तेरी ओरररररररररररर sssssssss
चारु, क्या हो गया है तुम्हें.. माँ कल रात भर सही से सो नहीं पायी हैं, क्यूँ इतना शोर मचाया हुआ है.
"मैं अपनी दोस्त निशी को जगाना चाह रही थी कि आओ देखो मौसम कितना सुहावना हो चला है बालकनी में बैठकर कॉफी पीते हैं..
भाभी बनकर जब से आयी है सबकी देखभाल करते करते अपनी दोस्त को भूल गयी है." चारु मुँह बनाते हुए बोली
"अरे मैं अपनी उस प्यारी सी दोस्त को कैसे भूल सकती हूँ जिसने मेरी ज़िंदगी के मौसम को सुहावना बना दिया. "निशी चारु के गले लगते हुए बोली. अब सिर्फ़ खुशियाँ ही खुशियाँ थी. दुख के बादल छट गये थे.
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NOOR EY ISHAL

