किसी दूर, बहुत दूर के देश में, एक ऐसा राज्य था जिसे अलौकिकालोक कहा जाता था। यह राज्य जादू और अद्भुत जीवों से भरा हुआ था, जहाँ हर चीज़ संभव थी। इस राज्य का शासक था राजा कल्पनावास, जिसका हर सपना हकीकत में बदल जाता था।
एक दिन, राजा कल्पनावास ने सोचा कि वह अपने राज्य को सबसे अनोखा बना देगा। उन्होंने अपनी जादुई छड़ी उठाई और पूरे राज्य में अलौकिक रचनाएँ करने का आदेश दिया।
पहली कल्पना में, राजा ने आसमान में सात इन्द्रधनुष बना दिए, जो कभी भी नहीं मिटते थे। इन इन्द्रधनुषों पर लोग यात्रा कर सकते थे और उन पर रंग-बिरंगे पक्षियों की सवारी कर सकते थे। हर इन्द्रधनुष के अंत में एक जादुई द्वार था जो किसी भी दुनिया में ले जा सकता था।
दूसरी कल्पना में, राजा ने जंगलों को चमकीले रत्नों से भर दिया। हर पेड़ पर हीरे, पन्ने, माणिक और नीलम लटके हुए थे। रात में ये रत्न चमकते थे और पूरा जंगल तारों की तरह जगमगाता था। इस जंगल में रुनझुन नाम की एक परियों की टोली रहती थी, जो हवा में संगीत बजाती और नाचती थी।
तीसरी कल्पना में, राजा ने एक विशाल जादुई झील बनाई, जिसका पानी सोने की तरह चमकता था। इस झील में तैरने वाली मछलियाँ भी सोने की थीं और पानी से जब भी कोई बूंद गिरती, वह एक छोटा सा सितारा बन जाती थी। इस झील के किनारे स्वर्णसर्प नाम की ड्रेगन की एक टोली रहती थी, जो आग की जगह सितारे उगलती थी।
चौथी कल्पना में, राजा ने एक ऐसा महल बनाया जो बादलों पर तैरता था। इस महल में जादुई पौधे और फूल उगते थे, जो हवा में सुगंध फैलाते थे। हर कमरे में जादुई आईने थे जो भविष्य की झलक दिखाते थे। इस महल में राजा के वफादार योद्धा, महानायक, रहते थे, जिनके पास हवा में उड़ने और पानी पर चलने की शक्तियाँ थीं।
अलौकिकालोक में हर कोई अपनी कल्पनाओं को जीता था। वहाँ की सड़कों पर उड़ते हुए घोड़े और चमकीले रंग के हाथी चलते थे। लोग एक दूसरे को जादुई उपहार देते और हर दिन एक नया रोमांचक अनुभव होता।
लेकिन एक दिन, राजा कल्पनावास ने देखा कि उनके राज्य में सब कुछ बहुत ज्यादा जादुई हो गया है। हर कोई इतनी चमत्कारिक चीज़ों में उलझ गया था कि उन्होंने साधारण जीवन का आनंद लेना छोड़ दिया था। उन्होंने सोचा कि शायद अब उन्हें कुछ साधारणता वापस लानी चाहिए।
राजा ने अपनी छड़ी उठाई और एक नया आदेश दिया: "कभी-कभी साधारणता में भी जादू होता है।" और इस प्रकार, अलौकिकालोक में संतुलन वापस आ गया। लोगों ने साधारण चीज़ों में भी खुशी और सुकून पाना शुरू कर दिया।
और इस प्रकार, कल्पनाओं का यह अद्भुत राज्य खुशहाल और संतुलित जीवन जीने लगा।
NOOR EY ISHAL


