आप भी कलम की हैरानी देखिये..
हँसी है इश्क़ या इश्क़ में है हँसी ये कहानी देखिये..
हमे भी हो गया एक बार यूँही एक फीवर
बहने लगी हर तरफ हमारे प्यार की रिवर
दूसरी तरफ का नहीं किया हमने हाल क्लीयर
खूब पीटे गये धूमधड़ाम चोट लगी बड़ी सिवीयर
सुनते थे हम अक्सर एकतरफ़ा इश्क के पंगे
क्या मति मारी गयी घूमते थे हम तो भले चंगे
तौबा हसीनों की गलियों मे ना दोबारा जाएंगे
बची मुश्किल से इज्ज़त ना दोबारा मार खाएंगे
आ गये दिन में तारे नज़र क्या घुमा घुमा के देते है
भरके भूसा खाल में कमबख्त खाल खींचे लेते हैं
हर वक़्त अब तो हमे उसके अब्बा नजर आते है
अक्सर नीन्दों में भी उसके अब्बा से डर जाते हैं
NOOR EY ISHAL

