जो बीत गयी वो बीती बातें हैं
रह गयी जो दिल में वो यादें हैं

तन्हा से हम मीलों फैली राहें हैं
मुस्कुराते हुए लबों में क़ैद आहें हैं

चलो अँधेरों से मोल ले लें कुछ ज़मी
घर माँगे खानाबदोश सी इक रौशनी

एक अजनबी यूँ अजनबी कर गया
इंतज़ार से अपने हमें गनीं कर गया

सब्र है दुआ है और है मसलेहत कोई
ओढ़ खामोशी की चादर हुआ सख्त कोई

अपने नूर से उदासियों की धुन्ध हटा देंगे
ए दिल हँसी खुशी जीना तुझे सिखा देंगे
NOOR EY ISHAL