जो राहें ज़िंदगी में मिल रहीं हैं
अँधेरों में मानो यूँ छिप रहीं हैं
होगा उरूज इक कोहिनूर का
माहौल बनेगा आमद ए नूर का
ना कोई शिकवा बाकी रहेगा
ये नूर मुस्तकिल साथी रहेगा
बिखरी होंगी खुशियाँ आगे आगे
इल्तिजा है रहो अँधेरों में जागे जागे
NOOR EY IYSHAAL

