फ़रियाद कर रही है तरसती हुई निगाह
मिले हुए किसी को शायद ज़माना हुआ

दिल के अँधेरों में एक आस का दिया 
बिन उसके हर लम्हा वीरान सा हुआ

हसीन यादों का कारवां यूँ ही संग है
हर पल में उसकी बातों का ही रंग है

खामोश लबों ने इक अफ़साना कहा
बयाँ करने का जिसे कोई बहाना हुआ

गहराईयों में दिल की दर्द का समंदर है
हर आहट में किसी साथ का मंजर है

बेमिसाल इक शख्सियत जैसे चाँदनी रात
बिन उसके हर खुशी जैसे कोई अधूरी बात

कशमाकश दिल में बहुत चली है मुसलसल
उम्मीदों की लौ अब भी जली है मुसलसल

वो वक्त के साथ गुज़र गई दौलत थी कोई
खुशबू उसकी अब कहीं हवाओं में है सोई

आ अब लौट चलें दिल को कुछ करार आये
खुशियाँ मिलें ऐसे वीरान दिल में बहार छाये

मंज़िलों की तलाश में जो कदम उठते थे कभी
आज वो राहें वीरान हैं मुन्तजिर हैं नूर के सभी
NOOR EY ISHAL