बड़ी खामोशी से चुपचाप गुजर जाना तेरा,

सैकड़ों सवाल पीछे छोड़ जाती है,

क्या कोई गिला था या कोई सिला मेरा,

हर बात को अधूरा छोड़ जाती है,

अक्सर बेपरवाही जब परवाह में बदल जाए,

यकीन होता है तसल्ली भी होती है,

कोई चुपचाप तेरे दिल के दरवाजे पर

दस्तक दे गुजर जाता है,

किसी खबर है क्या चीज है मोहब्बत,

बस एक एहसास है जो दिल को सुकून दे जाता है।


~ नियति चौधरी