सभी शिक्षकों को मेरा वंदन,

ना किसी व्यक्ति विशेष को,

हर उस शख्श को,

चिंता के समागम मे ,

टिकी थी जिन पर उम्मीद,

पर ना कि उन्होंने एक बार भी पहल,


सबसे बड़ा गुरु समय,

मुश्किल से सामना करना, कराया जैसे वाफिक,


खुली है जीवन की किताब,

अनुभव से भरने के खातिर,

गिरना-उठना है स्वाभाविक,

लेकिन जब साथ जो निभाएगा,

औऱ ,रंग जो दिखाएगा


कर सब बर्दाश्त ए बन्दे,

निश्चित ही हर वक़्त बहुत सिखाएगा।।

हर शख्स कुछ सिखाएगा ।