प्रीत का रंग होए है गहरा,,

जैसे अबीर - गुलाल !!


मन से बंधे जब, मन का धागा,

समझो, जीत लिए सब हथियार !!


फूल सी लागे जब वाणी,

सब दिन जैसे, लागे त्योहार !!



क्योंकि ,प्रीत का रंग होए है गहरा,,

जैसे अबीर - गुलाल !!




.....NIVEDITA SONI