भावी सपने को हावी कर,घूम रहे गली - गली।मंजिलो को पाने की आस से,तप रही हर कली - कली।मुठ्ठी में चाहते है दुनिया,मेहनत भी करनी मुठ्ठी भर ही है।फिर कहते है,मिलती नही सफलतादोष एक दूसरे को देते है ।
भावी सपने को हावी कर,घूम रहे गली - गली।
मंजिलो को पाने की आस से,तप रही हर कली - कली।
मुठ्ठी में चाहते है दुनिया,मेहनत भी करनी मुठ्ठी भर ही है।
फिर कहते है,मिलती नही सफलतादोष एक दूसरे को देते है ।