जीवन के पहलुओ से, प्रीत कर बैठी

घनी छाव में, रीत कर बैठी।

दिलो का मेल , अमीरी गरीबी का खेल

चूक कर बैठी।।


खुलना है राज , किस्सो का भार

कैसे लगाऐ नय्या उस पार।

जिंदगी की उहापोह में, प्रीत की आकांक्षाओ में

जिद कर बैठी।।


मिलना है साथ, समीक्षाओं का ज्ञान

चुनकर देना है जवाब ✌✌

किस्मत की निगाहों में,मजबूरी की लताओं में

भूल कर बैठी,भूल कर बैठी।।