जीवन के पहलुओ से, प्रीत कर बैठी
घनी छाव में, रीत कर बैठी।
दिलो का मेल , अमीरी गरीबी का खेल
चूक कर बैठी।।
खुलना है राज , किस्सो का भार
कैसे लगाऐ नय्या उस पार।
जिंदगी की उहापोह में, प्रीत की आकांक्षाओ में
जिद कर बैठी।।
मिलना है साथ, समीक्षाओं का ज्ञान
चुनकर देना है जवाब ![]()
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किस्मत की निगाहों में,मजबूरी की लताओं में
भूल कर बैठी,भूल कर बैठी।।


