बेटा लेकर बहु का नाम , 

छोड़ आएगा पिता को वृद्धा-आश्रम ,

बेटी लेकर दामाद का नाम,

नहीं लाएगी पिता को अपने द्वार | 


सोचो जरा पिता की नज़रों से ,

नहीं छोड़ा था बचपन में तुम्हारा हाथ ,

तुम्हारी सहुलियत के आगे , त्यागते थे सुख वो 

दबाकरअपने सपने सारे ,दे देते थे तुम्हे उपहार | 



अब अपनी बेसब्री के आगे,

न करो लज़्ज़ित उनको | 

अपनी गलतियों में मत गिनाओ, उनका हिस्सा | 


सोशल मीडिया पर डाल फोटो पिता संग। 

घर में खटिया न दे ,जो बाप को ,


औलादे , ऐसी हज़ार हे ,

कौन समझाए ऐसी आग को || 


घर होगा तुम्हारा मुकम्मल,

न छोड़ो कभी बाप को || 

भिड़ जाएगा वो हर आँधी से ,

बस केवल ,

मन तुम्हारा पिता के साथ हो,

और 

लफ्ज़ तुम्हारे शांत हो || 




NIVEDITA SONI